प्रेम नैनों में घुला, तन में अजब सी बात है
है धवल सी चाँदनी,आँखों में चढ़ती रात है
मन की रातों में तेरा वो रुप जलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है
है धवल सी चाँदनी,आँखों में चढ़ती रात है
मन की रातों में तेरा वो रुप जलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है
जो हवा चंदन बदन में घुल सुधा के पार है
उसके प्राणों पर ही अंकित प्रीत का त्योहार है
है सुगंधित संदली में उस बदनी की अल्पना
जो हमारे पास अब है थी कभी ना कल्पना
पीर पथ मेरे लिये घर से निकलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है
बिन तुम्हारे सांस अब है चढ़ रही है अर्श पर
ढूढ़ती चारों दिशायें गिर है पड़ती फर्श पर
बिन तुम्हारे जिन्दगी को आस भर जीता रहा
होंट जिसको छू न पाये वो जहर पीता रहा
भाग्य हाथों मे लिये तेरा बिछड़ना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद ह
प्रेम नैनों में घुला, तन में अजब सी बात है
है धवल सी चाँदनी,आँखों में चढ़ती रात है
मन की रातों में तेरा वो रुप जलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है
------------------यशपाल सजल--------------------

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