YASHPAL SAJAL (यशपाल सजल)
A SIGHT OF LOVE
Saturday, 29 July 2017
Sunday, 1 May 2016
शायरी
1. दो कौड़ी का फैशन ऊँची हैसियत ईजाद कर गया
कई करोड़ों की ख़ूबसूरती ये बर्बाद कर गया
2. आलम हमारी चाहत का, क्या क्या सवाल गढ़ता है
मुझे तुमसे प्यार है पर,कोई मुझसे प्यार करता है
3. कभी-कभी हमने यूं भी अपना दिल जलाया है
चांद समझ कर सूरज को सीने में बिठाया है
===========यशपाल सजल============
Tuesday, 29 March 2016
ग़ज़ल:मुहब्बत की हथेली पर लकीरें तुम बनाती हो
मुहब्बत की हथेली पर लकीरें तुम बनाती हो
हमारा नाम मिट सकता नही फिर भी मिटाती हो
इसे हिम्मत कहूं या इश्क़ का तेरा सलीका है
जहा,जिस दिल में रहती हो उसी दिल को जलाती हो
समझने में गुजारी है अभी तक ख़ुद को भी तुमने
यहां मुस्का के जाती हो वहां आँसू बहाती हो
तुम्हे मालूम भी तो हो तुम्हारी हरकतें सारी
कभी नीन्दों में आती हो कभी नीन्दें उड़ाती हो
हमारी याद का दीपक जले इक रौशनी बनकर
यहां मैं भी मनाता हूँ वहां तुम भी मनाती हो
--------------------------यशपाल सजल-----------------------------