Sunday, 1 May 2016

शायरी

1. दो कौड़ी का फैशन ऊँची हैसियत ईजाद कर गया
    कई करोड़ों की    ख़ूबसूरती    ये बर्बाद  कर गया

2. आलम हमारी चाहत का, क्या क्या सवाल गढ़ता है
    मुझे तुमसे प्यार है पर,कोई मुझसे प्यार करता है

3. कभी-कभी हमने यूं भी अपना दिल जलाया है
    चांद समझ कर सूरज को सीने में बिठाया है
     ===========यशपाल सजल============