1. एहसास उलझे दिल में नित बेशुमार है
तूझे जानता नही पर क्यों इंतज़ार है
मुस्कान तेरे लब की मुझसे जो है गुजरी
शक हीं सही भरम में मुझे तुझसे प्यार है
2. मेरे प्राण की सतह पर तू है पिघल गयी
समझौता हीं सही पर दिल को बदल गयी
मेंहदी की पत्तियां तब झूमी जो प्रीत पर
हाँथों पर वो मेंहदी किस्मत में ढल गयी
3. नाकाम दिल की बस्ती दरिया के पार है
अधरों पे बूंद शक की तुझे इख़्तियार है
तुम इश्क़ बनके उतरे मुझको ये है गुरूर
जिसे ख़ुद की न ख़बर है ,तुझे उससे प्यार है
4. फ़ुरसत में ज़िन्दगी है जिन्दा मकाम है
हर शाम ज़िन्दगी से रातों के नाम है
ग़ैरत में मै जिया हूं ग़ैरत है फैसला
बिन मेरी तारीफों के , सजना हराम है
5. हम इश्क़ के वो पंछी संकोच में रहते
इज़हार मैं ना करता तुम भी नही करते
मुद्दत है गुजरे उलझन में मै कहूं या तुम
मै भी तड़प के रहता तुम भी नही कहते
6.होठों की मुस्कुराहट बस पी रहा हूँ मैं
मेरा हाल पूछने को आदी रहा हूँ मैं
जिसे तुम समझ हो बैठे इक दोस्ती फ़कत
उसे इश्क़ ही समझकर बस जी रहा हूँ मैं
7.जो प्रीत बनके उलझी,सुलझी नही रब तक
कस्तूरी सी महक से ढूढ़ू तुझे कब तक
मुझमे तुम्हारी सांस का अधिकार यूं हुआ
था सांस से परे पर जीता रहा अब तक
-यशपाल सजल-
-यशपाल सजल-
