1.ठोक ठाक के कर दिया,मटका गोलाकार|
पानी मटके से गिरा, भूल गया आकार||
2.तुम्हारी नारज़गी का दम कभी तो निकलेगा
पछता रहे नैनों का पानी तभी तो निकलेगा
3.तुम पूछ रहे हो ठिकाना मेरा!
दिल क्या दरिया में डाल आये हो?
4.ख़ून यूं हीं नही उबला आंखों में इश्क़ का
रोशन तुम्हारी याद ने दिल को जलाये हैं
5.टूट कर तेरे इश्क़ मे बिखरा नही कभी
समेटने वाले को नाम किसका बोलता?
6.बेवकूफ़ यूं ना समझो कि चुप रहता हूं
घटिया औकात के मुंह,नही लगता हूं
7.आजादी तो मिली हमे, उन गोरों के अधिकारों से
देश अभी भी चोटिल है,कुछ चोरों के अधिकारों से
8.गलती मुझमे नही ढूंढो,रूसवाई की
तेरी मुहब्बत है फ़र्जी,आशनाई की
9.तुम्हारी नफ़रत की धुंध मुझमे, उतरे तो सही
मुहब्बत में बदलना तो तुम्ही से सीखा है
10.शिकायत मुझको नही मेरे शराब पीने से
इक आंधी थम जाती है,कुछ पल को सीने से
11.सितारें फ़लक के मेरी छत पे जो आये हैं
पागल हैं मेरे चाँद को दिल में बिठाये हैं
12.कभी कभी हमने यूं भी अपना दिल जलाया है
चाँद समझकर सूरज को सीने में बिठाया है
---यशपाल सजल---
---यशपाल सजल---
