मुलाकात के क्षितिज पर खुशियों का मंजर शाम है
मै जो भी हूं , भी रहूंगा सब तुम्हारे नाम है
मंद मंद कुछ थी हवा उस चिलचिलाती धूप में
साया बनी जो धूप में क्या खूब तेरा काम है
जगा जगा सोया रहा दिन की नजर पूनम पर है
पूनम फ़कत रातों से है छिटका यहीं पयाम है
कोशिश मे था, समेट लूं वह चांदनी आगोश में
पर मैं तभी था भूल सा मावस मेरा अन्जाम है
भोर की बहती पवन लाली चुमन को उमड़ी है
आँख को मलते करों में लिखा तेरा पैगाम है
आज झूमा है चमन भौरों के सुर पनाह में
लड़खड़ायी जीभ में पहली नज़र का जाम है
--यशपाल सजल --
