Sunday, 1 May 2016

शायरी

1. दो कौड़ी का फैशन ऊँची हैसियत ईजाद कर गया
    कई करोड़ों की    ख़ूबसूरती    ये बर्बाद  कर गया

2. आलम हमारी चाहत का, क्या क्या सवाल गढ़ता है
    मुझे तुमसे प्यार है पर,कोई मुझसे प्यार करता है

3. कभी-कभी हमने यूं भी अपना दिल जलाया है
    चांद समझ कर सूरज को सीने में बिठाया है
     ===========यशपाल सजल============

Tuesday, 29 March 2016

ग़ज़ल:मुहब्बत की हथेली पर लकीरें तुम बनाती हो

मुहब्बत  की  हथेली  पर  लकीरें  तुम  बनाती हो
हमारा नाम मिट सकता नही फिर भी मिटाती हो

इसे  हिम्मत  कहूं  या   इश्क़  का  तेरा  सलीका है
जहा,जिस दिल में रहती हो उसी दिल को जलाती हो

समझने में गुजारी है  अभी तक ख़ुद को भी तुमने
यहां  मुस्का  के जाती  हो    वहां  आँसू  बहाती हो

तुम्हे  मालूम  भी   तो  हो     तुम्हारी  हरकतें  सारी
कभी नीन्दों  में   आती  हो   कभी  नीन्दें  उड़ाती हो

हमारी  याद  का दीपक  जले     इक रौशनी बनकर
यहां  मैं  भी  मनाता  हूँ     वहां  तुम   भी  मनाती हो

--------------------------यशपाल सजल-----------------------------

Sunday, 27 March 2016

मुक्तकें


1.मैं उस धड़कन से जिन्दा हूँ,जो तुझपे रोज मरती है
    तुम्हारे  बिन  मेरी  रातें   ,शिकायत  रोज करती है
    ये आलम है  निकलने का   हमारी जान,बिछड़ने से
    वहां  तेरी  निकलती  है,  यहां  मेरी  निकलती  है

2.सभी ही  डूब  जाते हैं   मुहब्बत  की पनाहो में
   कभी तो एक ही चेहरा जले सबकी निगाहों में
   उतर कर चाँद आंगन में,मेरे घर में समाये पर
   दीवाने  रूठ   जाते है, कई  उसके  ही  राहों में

3 बुलती  है  ऊंचाई  पर  जमीं  न  छोड़ने  आया
   तेरे जैसा  कभी मुझको  नहीं मुंह मोड़ने आया
   ये करनी अपनी अपनी है दिलों के साथ करने की
   तूझे  ना  जोड़ने  आया  ,मुझे  ना  तोड़ने आया

4.खड़ा था मैं किनारे पर,फिसल के तूझ में आया हूँ
   समंदर  में जा  डूबा है,  हूनर  सुरज से पाया  हूँ
   तेरे दिल के ठिकाने से मिला   है जो,मुझे जितना
   उसे लेकर जमाने में  हर इक धड़कन पे छाया हूँ

5.जो आँखों को जलाती है सुहानी रात ही क्या है
   जो फूलों को भिगा न दे   भी  बरसात ही क्या है
   यूं समझो ना ये लड़कों को बेकारी में पड़े आशिक
  जो पीछे ये न भागे तो  तेरी औकात ही क्या है
                       ---यशपाल सजल---

गीत: दिल के गालों को मेरे

प्रेम नैनों में घुलातन  में अजब सी बात है
है धवल सी चाँदनी,आँखों में चढ़ती रात है
मन की रातों में तेरा वो रुप जलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है

जो हवा चंदन बदन में घुल सुधा के पार है
उसके प्राणों पर ही अंकित प्रीत का त्योहार है
है सुगंधित संदली में उस बदनी की अल्पना
जो  हमारे पास अब है  थी  कभी ना कल्पना
पीर पथ मेरे लिये   घर से निकलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है

बिन तुम्हारे सांस अब है चढ़ रही है अर्श पर
ढूढ़ती चारों दिशायें     गिर है पड़ती  फर्श पर
बिन तुम्हारे जिन्दगी को आस भर जीता रहा
होंट जिसको छू   पाये   वो जहर पीता रहा
भाग्य हाथों मे लिये     तेरा बिछड़ना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद

प्रेम नैनों में घुला,  तन  में अजब सी बात है
है धवल सी चाँदनी,आँखों में चढ़ती रात है
मन की रातों में तेरा वो रुप जलना याद है
दिल के गालों को मेरे तेरा मसलना याद है
------------------यशपाल सजल--------------------

गीत:रंग यादों में भर जाऊंगा,जीना मुश्किल कर जाऊंगा



तेरी   गलियों  में  आऊंगामन  रंगों का  भरना होगा
बचकर भी जी पाओगी,अर्पण ख़ुद को करना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

जो सर्द हवा तूझसे गुजरी,शायद सिहरन का पहरा है
दर्शन  तेरे  शरमाने को  मौसम  भी  कब  से  ठहरा  है
जिस पल को हम सदियां तड़पें,उस पल को क्यों तड़पाती हो
सब मालूम है तुमको लेकन ,बस दूर खड़ी मुस्काती है
जो  रंग  गाल  पर उतरेगा  उसे  धड़कन  पर चढ़ना होगा
हर चिन्ह मिटा दोगी तुम पर सदियों दिल को पढ़ना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

कलियों सी कोमल काया अब खिलने से क्यों डरती है
महकेगी मुझसे मिलकर   फिर मिलने से क्यों डरती है
जीवन   के  कोरेपन     में    त्योहार   दिखाने   वाला  हूं
ख़ुद  में  मुझको  पाओगी     वो  प्यार  दिखाने  वाला हूं
हाथों   का  स्पर्श   अब   तेरे    गालों   पर  गढ़ना  होगा
जिसे  यादों  में  जिन्दा  रहकर   इस पल को मरना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

तेरी   गलियों  में  आऊंगा,  मन  रंगों का  भरना होगा
बचकर भी जी न पाओगी,अर्पण ख़ुद को करना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा
------------------------यशपाल सजल--------------------------

गीत:रंग यादों में भर जाऊंगा,जीना मुश्किल कर जाऊंगा

तेरी   गलियों  में  आऊंगामन  रंगों का  भरना होगा
बचकर भी जी पाओगी,अर्पण ख़ुद को करना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

जो सर्द हवा तूझसे गुजरी,शायद सिहरन का पहरा है
दर्शन  तेरे  शरमाने को  मौसम  भी  कब  से  ठहरा  है
जिस पल को हम सदियां तड़पें,उस पल को क्यों तड़पाती हो
सब मालूम है तुमको लेकन ,बस दूर खड़ी मुस्काती है

जो  रंग  गाल  पर उतरेगा  उसे  धड़कन  पर चढ़ना होगा
हर चिन्ह मिटा दोगी तुम पर सदियों दिल को पढ़ना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

कलियों सी कोमल काया अब खिलने से क्यों डरती है
महकेगी मुझसे मिलकर   फिर मिलने से क्यों डरती है
जीवन   के  कोरेपन     में    त्योहार   दिखाने   वाला  हूं
ख़ुद  में  मुझको  पाओगी     वो  प्यार  दिखाने  वाला हूं

हाथों   का  स्पर्श   अब   तेरे    गालों   पर  गढ़ना  होगा
जिसे  यादों  में  जिन्दा  रहकर   इस पल को मरना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा

तेरी   गलियों  में  आऊंगा,  मन  रंगों का  भरना होगा
बचकर भी जी न पाओगी,अर्पण ख़ुद को करना होगा
रंग  यादों  में  भर   जाऊंगा
जीना मुश्किल कर जाऊंगा